बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत विद्यार्थियों को किया जागरूक, सामाजिक कुरीति के खिलाफ आवाज उठाने का किया आह्वान
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत विद्यार्थियों को किया जागरूक, सामाजिक कुरीति के खिलाफ आवाज उठाने का किया आह्वान
– बच्चों के सुरक्षित भविष्य और शिक्षा की राह में बाधा है बाल विवाह, इसे रोकने में युवाओं की भूमिका अहम : डीसी
फरीदाबाद, 3 नवंबर।
बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने तथा बच्चों के अधिकारों एवं सुरक्षित भविष्य की रक्षा के उद्देश्य से केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत 100 दिवसीय जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में उपायुक्त आयुष सिन्हा के मार्गदर्शन में ओल्ड फरीदाबाद स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों, बच्चों की शिक्षा एवं भविष्य पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभावों तथा इस सामाजिक कुरीति को रोकने के लिए बनाए गए कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी हेमा कौशिक ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य में बाधा उत्पन्न करने वाली गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के कारण बच्चों का शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षणिक विकास प्रभावित होता है और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर नहीं मिल पाते। इस कुरीति को समाप्त करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं एवं विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।
उन्होंने छात्राओं को जागरूक करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की महत्वपूर्ण ताकत है। विद्यार्थी स्वयं बाल विवाह के विरुद्ध जागरूक रहकर अपने परिवार, आसपास के लोगों और समाज को भी इस कुप्रथा के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक कर सकते हैं। उन्होंने बाल विवाह निषेध से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों को उनके अधिकारों और कानून के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से ही बाल विवाह मुक्त समाज का निर्माण संभव है।
हेमा कौशिक ने आमजन से अपील की कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने के लिए प्रशासन का सहयोग करें। यदि कहीं भी बाल विवाह होने की जानकारी मिलती है, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें, ताकि समय रहते हस्तक्षेप कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके और बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस अवसर पर ओल्ड थाना से सब-इंस्पेक्टर गजेंद्र भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी बाल विवाह की रोकथाम में कानून एवं पुलिस प्रशासन की भूमिका के संबंध में जानकारी दी। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने और अपने आसपास ऐसी किसी भी घटना को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।

