कर्नाटक का ‘नाटक’: अदालती लड़ाई में दो बार जीते येदियुरप्पा लेकिन विधायकों की ‘अदालत’ में हारे
नई दिल्ली: कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में गुरुवार को ही शपथ ग्रहण करने वाले बीएस येदियुरप्पा को आखिरकार विश्वास मत के पहले ही ‘हार’ स्वीकार करनी पड़ी. सरकार बनाने के लिए बहुमत की पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण येदियुरप्पा ने शपथ लेने के दो दिन बाद ही इस्तीफा दे दिया. कर्नाटक में येदियुरप्पा की यह हार इस मायने में उल्लेखनीय रही कि कर्नाटक में सरकार गठन के मामले में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ अदालती लड़ाई में उन्हें दो बार ‘जीत’ हासिल हुई थी लेकिन विधायकों की ‘अदालत’ यानी विधानसभा में उन्हें संख्या के अभाव में हार का सामना करना पड़ा.
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी के 104 विधायकों ने जीत हासिल की थी और सदन में बहुमत साबित करने के लिए उसे 112 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी. यह संख्या जुटाने में येदियुरप्पा और उनकी बीजेपी सरकार नाकाम रही और विश्वास मत हासिल करने के पहले ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. उनके इस इस्तीफे के साथ ही राज्य में जेडी-एस और कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है. यह तीसरी बार है जब कार्यकाल पूरा करने के पहले ही येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद राज्यपाल वजूभाई वाला ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया था. राज्यपाल के इस फैसले का कांग्रेस और जेडी-एस से विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी. इन दोनों दलों का आरोप था कि राज्यपाल ने बीजेपी के कथित तौर पर एजेंट के रूप में काम करते हुए राज्यपाल ने येदियुरप्पा को शपथ लेने के लिए बुलाया है. यही नहीं, उन्होंने शीर्ष अदालत से येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने के आग्रह किया था.

