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प्रधानमंत्री ने संतुलन के लिये लोगों को प्रकृति प्रेमी, प्रकृति रक्षक बनने का सुझाव दिया

देश के अलग अलग हिस्सों में अधिक बारिश और कम बारिश का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों को प्रकृति प्रेमी, प्रकृति रक्षक और प्रकृति संवर्धक बनने का सुझाव दिया ताकि प्रकृति प्रदत्त चीजों का संतुलन बना रहे ।आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने कहा कि इन दिनों कई जगहों पर अच्छी वर्षा होने की ख़बरें आ रही हैं। कहीं-कहीं पर अधिक वर्षा के कारण चिन्ता की भी ख़बर आ रही है और कुछ स्थानों पर अभी भी लोग वर्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं।उन्होंने कहा, ‘‘भारत की विशालता, विविधता, कभी-कभी वर्षा भी पसंद-नापसंद का रूप दिखा देती है । लेकिन हम वर्षा को क्या दोष दें । मनुष्य ने ही प्रकृति से संघर्ष का रास्ता चुना जिसका नतीज़ा है कि कभी-कभी प्रकृति हम पर रूठ जाती है।’’    कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने उस वक्त कहा था, ‘‘दक्षेस क्षेत्र में लोगों से लोगों का संपर्क बढ़ाने और रिश्तों को मजबूत करने के मकसद से दक्षेस देशों में सरकारी कर्मियों को एलटीसी सुविधा दिए जाने के प्रस्ताव का सरकार ने परीक्षण किया। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद प्रस्ताव व्यावहारिक नहीं पाया गया और इसे आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय किया गया।’’ दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं।ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में केंद्र सरकार के कर्मियों की संख्या करीब 48.41 लाख है।

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