कांग्रेस ने केंद्र सरकार को लगाया आरोप, कहा- दलित मुद्दे पर जानबूझकर की गई देरी

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न निवारण) अधिनियम पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से पैदा हुई स्थिति से निबटने में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है. कांग्रेस ने कहा कि केंद्र सरकार चाहती तो अभी तक संसद में संशोधन लाकर उस बिल को ठीक वैसे ही पारित करवा सकती है जैसे उसने वित्त विधेयक को पारित करवाया था. साथ ही भारत बंद के दौरान हुई हिंसा और नुकसान के लिए भी कांग्रेस ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं गुलाम नबी आजाद एवं मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की दलितों एवं समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण में कोई रूचि नहीं है.

आजाद ने दलित संगठनों द्वारा किए गए बंद का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत बंद सरकार के खिलाफ है, सरकार की कमजोरी, उसकी खामोशी के खिलाफ है और यह पूरी तरह सफल रहा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करती. भारत बंद के दौरान जान-माल का जो नुकसान देश में हुआ है उसके लिए भी सरकार जिम्मेदार है. आजाद ने कहा कि हमारी लड़ाई उच्चतम न्यायालय से नहीं केन्द्र सरकार से है. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में इस मामले का सही ढंग से प्रतिनिधित्व नहीं किया. न्यायालय में यदि एटार्नी जनरल या उनके सहायक इस मामले की ढंग से पैरवी करते तो इस कानून को कमजोर नहीं किया जाता.

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