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अपहृत भारतीयों को छुड़ाने के लिए कबायली प्रमुखों के साथ काम कर रहे अफगान अधिकारी

अफगानिस्तान में सुरक्षा अधिकारी अपहृत किए गए सात भारतीय इंजीनियरों की रिहाई के लिए स्थानीय कबायली सरदारों के साथ काम कर रहे हैं।

सातों भारतीय इंजीनियरों का कल तालिबान के बंदूकधारियों ने अशांत उत्तरी बगलान प्रांत में अपहरण कर लिया था।

मीडिया की खबरों में आज यह जानकारी दी ग ई है।

प्रांतीय पुलिस के प्रवक्ता जबीउल्ला शूजा ने बताया कि आरपीजी समूह की कंपनी केईसी इंटरनेशनल के भारतीय इंजीनियर एक बिजली उप केंद्र के निर्माण की परियोजना पर काम कर रहे थे।

सातों इंजीनियर कल कार्य की प्रगति का जायजा लेने जा रहे थे। चश्मा ए शीर इलाके में उग्रवादियों ने उनका अपहरण कर लिया।

शूजा ने बताया कि इंजीनियरों को ले जा रहा उनका अफगान वाहन चालक भी लापता है। इन लोगों की रिहाई के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

प्रांत में सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि अपहृत भारतीय इंजीनियरों की रिहाई के लिए अफगान बल , सरकारी अधिकारी और स्थानीय कबायली सरदार प्रयास कर रहे हैं।

प्रांतीय गवर्नर अब्दुल नेमती ने बताया कि सुरक्षा बल और स्थानीय अधिकारी लापता इंजीनियरों और उनके वाहन चालक का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आश्वासन दिया कि लापता भारतीय इंजीनियरों और उनके वाहन चालक को शीघ्र ही रिहा कर दिया जाएगा।

बगलान के गवर्नर ने कल कहा था कि आतंकी समूह ने भारतीय इंजीनियरों और उनके वाहन चालक का यह सोच कर अपहरण किया कि वे सरकारी कर्मचारी हैं।

अभी तक किसी भी समूह ने अपहरण की जिम्मेदारी नहीं ली है।

नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह अफगानिस्तान में प्राधिकारियों से संपर्क बनाए हुए है।

वर्ष 2016 में काबुल में 40 वर्षीय भारतीय राहत कर्मी जुडिथ डिसूजा का अपहरण कर लिया गया था। उसे 40 दिन बाद रिहा किया गया था।

भारत ने युद्ध से जर्जर अफगानिस्तान को आर्थिक विकास के लिए कम से कम 2 अरब डालर की सहायता मुहैया कराई है।

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