कर्नाटक : चन्नपटण की नायाब कला में दिखती है राजनीति की झलक
नई दिल्ली: बेंगलुरू से कोई 60 किलोमीटर दूर है छोटा सा कस्बा चन्नपटण जिसे चन्नपट्टण भी कहा जाता है. अभी तो चन्नपटण एचडी देवगौड़ा के बेटे और जेडीएस नेता कुमारस्वामी की वजह से चर्चा में है. एचडी कुमारस्वामी अपनी परम्परागत सीट रामनगर के अलावा चन्नपटण से भी मैदान में हैं. कहा जा रहा है कि कुमारस्वामी अगर दोनों सीटों से जीते तो यहां चन्नपटण में उपचुनाव तय है और फिर वे यहां से अपनी पत्नी को लड़ाएंगे.
लेकिन चन्नपटण की पहचान राजनीति नहीं है, यहां की कला और कारीगरों का महारत है. चन्नपटण जाना जाता है अपने सिल्क यार्न (धागा) के लिए और लकड़ी के खिलौनों के लिए. ज़रा अमेज़न जैसी ऑनलाइन वेबसाइट पर जाएंगे तो पता चलेगा कि चन्नपटण की ये कारीगरी क्या चीज़ है.
चन्नपटण के लकड़ी के खिलौनों में हवाई जहाज़ से लेकर पर्दे के साथ लटकने वाले हैंगिंग और फानूस के अलावा आर्टिकल होल्डर से लेकर पेपरवेट और बच्चों की गाड़ी और झुनझुना सबकुछ है. कीमत 100 रुपये से शुरू होकर हज़ार को पार कर जाती है. लेकिन कई खरीदार महंगे सामान को खरीदने के लिए अच्छा मोलभाव करते भी दिखे.
सिल्क के धागे के अलावा इन खिलौनों की देश-विदेश में धूम है. लेकिन कर्नाटक की संभावित राजनीति की झलक भी इसमें दिखती है. झुनझुना देखकर लगता है कि अगर त्रिशंकु विधानसभा हुई तो क्या बड़ी पार्टियां विधायकों को तोड़ने के लिए ऐसे ही पावर और पैसे का झुनझुना दिखाएंगी. हिलते-डुलते पेपर वेट से खयाल आया कि क्या खरीद फरोख्त की सियासत हुई तो नेताओं के दिल ऐसे ही डोलेंगे. हाथ में माइक और कैमरा देखकर एक खरीदार वरुणेश शायद दिल की बात भांप गए. वे कहते हैं, “टक्कर कड़ी है, दिल ललचाएगा जैसे खिलौनों को देखकर हो रहा है.”
अब धीरे-धीरे यही खतरा चन्नपटण में पहुंच गया है. खिलौनों के बीच चाइनीज़ हाथ के पंखे दिखते हैं तो समझ आता है कि चन्नपटण में ही कारीगरों को सरकार का साथ चाहिए. इस नायाब कला को मुक्त बाज़ार और बिचौलियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. चुनाव कोई भी जीते चन्नपटण की पहचान सिल्क और लकड़ी के खिलौने ही रहने चाहिए मौकापरस्त राजनीति नहीं.

