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यह है विराट कोहली पर पड़ रही थकान की मार की ‘असल वजह’

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने साफ कर दिया है कि विराट कोहली की गर्दन में मोच है. लेकिन अच्छी तरह से समझा जा सकता है कि मसला गंभीर है क्योंकि सिर्फ गर्दन की मोच के चलते ही पहले से तय काउंटी करार को रद्द करने का फैसला नहीं लिया जा सकता है. न ही गर्दन की मोच के लिए एनसीए में जाकर पुनर्वास की जरुरत है. बुधवार को विराट कोहली ने एक्सरसाइज करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को जो फिटनेस चैलेंज दिया, उससे कहीं से भी नहीं लग रहा कि कोहली को गर्दन में कोई समस्या है.

इससे पहले बीसीसीआई के ‘फाइनल जवाब’ से पहले बोर्ड के एक अधिकारी ने विराट की चोट की खबर पर अपना नाम न छापने की शर्त पर पुष्टि करते हुए कहा था कि यह थकावट से जुड़ा  हुआ मामला है और यह चोट के मुकाबले काम के बोझ से जुड़े प्रबंधन का मामला है. लेकिन यह स्लिप डिस्क का मामला नहीं है. अब हम विराट के काम के बोझ पर नजर रखेंगे.  इस अधिकारी ने कहा था कि हम ऐसी योजना बना रहे हैं, जिसके तहत विराट के काउंटी कार्यक्रम को छोटा किया जाएगा. विराट कोहली अपने मूल कार्यक्रम के अनुसार दो चार दिनी मैच खेलेंगे. और वह रॉयल लंदन कप के तहत पचास ओवर के मैच नहीं खेलेंगे. बहरहाल अब बोर्ड ने विराट कोहली का सर्रे काउंटी से जुड़ा विराट का पूरा दौरा ही रद्द कर दिया है.

जाहिर है कि इससे विराट कोहली की इंग्लैंड तैयारियों को बड़ा झटका लगा है. विराट इंग्लैंड के मुश्किल दौरे की तैयारी को लेकर इतने ज्यादा संजीदा थे कि उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ 14 जून से बेंगलुरु में खेले जाने वाले इकलौते ऐतिहासिक टेस्ट से भी हटने का फैसला कर लिया था.  बहरहाल, बोर्ड ने फाइनल जवाब में थकावट का जिक्र भले ही न किया हो, लेकिन इससे पहले अधिकारी के बयान की अनदेखी नहीं की जा सकती है. यह समझा जा सकता है कि विराट कोहली पर काम का कितना ज्यादा बोझ है. अगर आपको अंदाजा नहीं है, तो हम आपको सबूत दिए देते हैं, जिससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि विराट कोहली होना अपने आप में आसान काम नहीं है. चलिए जून 217 से मई 2018 तक इन आंकड़ों पर गौर कीजिए.* इस दौरान विराट कोहली ने 9 टेस्ट मैच खेले
* पिछले 12 महीनों में भारत के लिए 32 में से 29 वनडे खेले
* 18 में से 9 टी-20 मैच खेले
* कुल मिलाकर विराट ने 59 में से 47 मैच खेले
* आईपीएल के 15 मैच खेले

अब आप जान ही चुके हैं कि विराट कोहली पर कितना बोझ है काम का. बीसीसीआई ने भी एक तरह से इसे मान लिया है. अब देखने की बात यही होगी कि इस बोझे से निपटने के लिए बोर्ड क्या फॉर्मूला लेकर आता है.

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