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उच्चतम न्यायालय ने कुडनकुलम संयंत्र में भंडारण की व्यवस्था के लिए समय सीमा अप्रैल 2022 तक बढ़ायी

नयी दिल्ली , दो जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने आज न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) को कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में इस्तेमाल हो चुके परमाणु विकरण ईंधन के सुरक्षित भंडारण का प्रबंध करने के लिए अप्रैल 2022 तक का समय दिया। न्यायालय ने इस काम के लिये पहले एनपीसीआईएल को इस साल 30 मई तक का समय दिया था। न्यायालय ने इस्तेमाल हो चुके परमाणु ईंधन के भंडारण की व्यवस्था ‘ अवे फ्रॉम रिएक्टर फैसिलीटी ’ के निर्माण के लिए यह अवधि बढ़ाई है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और डी वाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने निगम की ओर से पेश हुये अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर विचार किया जिसमें उन्होंने भंडारण सुविधा के निर्माण के लिए यह अवधि 30 अप्रैल 2022 तक बढ़ाने का अनुरोध किया। हालांकि , खंडपीठ ने यह स्पष्ट कर दिया कि तमिलनाडु में परमाणु संयंत्र में एएफआर बनाने के लिए निगम को आगे और समय नहीं दिया जाएगा। च्चतम न्यायालय ने पूर्व में केंद्र को इस्तेमाल होने वाले परमाणु ईंधन के सुरक्षित भंडारण सहित विभिन्न सुरक्षा उपायों के अनुपालन के तहत परमाणु संयंत्र को क्रियान्वित करने की अनुमति दी थी। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुई कई मुठभेड़ों के फर्जी होने का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर राज्य सरकार से आज जवाब मांगा। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने गैर सरकारी संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी (पीयूसीएल) की जनहित याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया। पीयूसीएल की ओर से वकील संजय पारिख ने आरोप लगाया कि हाल में उत्तर प्रदेश में 500 मुठभेड़ हुई है जिनमें कुल 58 लोग मारे गए। पीठ ने इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी पक्षकार बनाने का अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने भी इस मुद्दे पर पहले राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था।

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