सरकारी योजनाओं में विधवाओं को वरीयता देने की ज़रूरत : नायडू
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने महिला सशक्तिकरण के लिए लागू की गई सरकारी योजनाओं में विधवाओं को वरीयता देने की ज़रूरत पर बल दिया है।नायडू ने आज यहाँ आयोजित एक संगोष्ठी में जनगणना के आँकड़ों के हवाले से कहा कि भारत में 4.3 करोड़ महिलाएँ विधवा हैं। इनमें से 58 फ़ीसदी विधवाओं की उम्र 60 साल से ज़्यादा है जबकि 10 फ़ीसदी की उम्र 20 से 39 साल के बीच है। उन्होंने विधवा कल्याण से जुड़े समाज सुधारकों राजा राममोहन राय और ईश्वर चंद्र विद्यासागर के प्रयासों का उल्लेख करते हुए विधवा पुनर्विवाह को समाज द्वारा बढ़ावा देने की ज़रूरत पर बल दिया।नायडू ने इस दिशा में सामाजिक कुरीतियों को ख़त्म करने का आह्वान करते हुए कहा कि अगर पत्नी की मौत पर पति दूसरी शादी कर सकता है तो पति की मौत पर महिला को फिर से शादी करने से रोकना ना तो तर्कसंगत है ना ही मानवीय।विधवा कल्याण के लिए विश्वस्तर पर काम कर रही ब्रिटिश संस्था द लूम्बा फ़ाउंडेशन द्वारा ‘विश्व विधवा कल्याण दिवस’ के मौक़े पर आयोजित संगोष्ठी में नायडू ने भारत में केंद्र सरकार द्वारा विधवाओं को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार को मकान और भूमि आवंटन के मामलों में विधवाओं को वरीयता देना चाहिए। इससे इनके सशक्तिकरण में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब वह शहरी विकास मंत्री थे तब इस तरह की पहल की गई थी, इसे अब अमलीजामा पहनाने की ज़रूरत है।
इस मौक़े पर द लूम्बा फ़ाउंडेशन की अध्यक्ष शेरी ब्लेयर, संस्था के संस्थापक लॉर्ड लूम्बा और क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी मौजूद थे। ब्लेयर ने संस्था की ओर से भारत में विधवाओं के लिए अलग आयोग बनाने और विधवाओं को अल्पसंखयक का दर्जा देने की माँग की। प्रसाद ने इन माँगों के क़ानूनी पहलुओं पर विचार कर शीघ्र कोई फ़ैसला करने का भरोसा दिलाया।इस दौरान लॉर्ड लूम्बा ने कहा कि विश्व में दस में से एक महिला विधवा है और दुनिया भर में ये महिलायें असमानता एवं अत्याचार की शिकार है।

