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बायोगैस उपयोग कार्यक्रम है स्वच्छ ऊर्जा की ओर सशक्त कदम: एडीसी सतबीर मान

– गौशालाओं, डेयरियों और संस्थागत इकाइयों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना हेतु राज्य सरकार देगी 40% की आर्थिक सहायता

– पशु अपशिष्ट उपयोग करने वाले संयंत्रों पर केंद्र सरकार द्वारा ₹15,000 से ₹40,000 प्रति किलोवाट तक की सब्सिडी मिलेगी

फरीदाबाद, 26 जून।

जिला प्रशासन फरीदाबाद द्वारा हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (HAREDA) के सहयोग से बायोगैस उपयोग कार्यक्रम को ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में तेजी से प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जा रही है। अतिरिक्त उपायुक्त सतबीर मान ने जानकारी देते हुए बताया कि बायोगैस एक स्वच्छ, प्रदूषण रहित, धुंआ रहित और किफायती ईंधन है, जो 55 से 70 प्रतिशत मीथेन गैस से भरपूर होता है। इसे गोबर गैस संयंत्र के माध्यम से पशुओं के गोबर और जैविक पदार्थों से उत्पन्न किया जाता है।

उन्होंने बताया कि हरियाणा में लगभग 7.6 मिलियन पशुधन है, जिससे प्रतिदिन लगभग 3.8 मिलियन घन मीटर बायोगैस उत्पन्न करने की क्षमता है, जो लगभग 300 मेगावाट विद्युत उत्पादन में सहायक हो सकती है। इस गैस को शुद्ध कर बायो-CNG के रूप में भी प्रयोग में लाया जा सकता है।

हरेडा (HAREDA) द्वारा संचालित योजनाएं:

  1. संस्थागत बायोगैस कार्यक्रम (Institutional Biogas Programme): गौशालाओं, डेयरियों और संस्थागत इकाइयों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार 40% की आर्थिक सहायता दे रही है। अब तक राज्य में 114 संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इस योजना के अंतर्गत 25 से 85 घन मीटर क्षमता वाले संयंत्रों के लिए ₹1.27 लाख से लेकर ₹3.95 लाख तक की सब्सिडी दी जा रही है।
  2. बायोगैस पावर (ऑफ ग्रिड) उत्पादन कार्यक्रम: पशु अपशिष्ट से उत्पादित बायोगैस का उपयोग करके 3 किलोवाट से लेकर 250 किलोवाट तक की विद्युत उत्पादन क्षमता वाले संयंत्रों पर केंद्र सरकार द्वारा ₹15,000 से ₹40,000 प्रति किलोवाट तक की सब्सिडी दी जाती है।

आवेदन प्रक्रिया:

• इच्छुक लाभार्थियों को संबंधित जिले के अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय में निर्धारित प्रपत्र (Annexure-I एवं II) के साथ आवेदन करना होगा।

• संयंत्र की स्थापना KVIC ड्रॉइंग के अनुसार लाभार्थी द्वारा की जाएगी।

• परियोजना को छह माह के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य है।

• आवेदन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर स्वीकार किए जाएंगे, परंतु गौशालाओं व धार्मिक संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी।

सुरक्षा राशि:

परियोजना की गारंटी के लिए 25 से 45 क्यूबिक मीटर संयंत्र के लिए ₹30,000 एवं 60 से 85 क्यूबिक मीटर संयंत्र के लिए ₹50,000 सुरक्षा निधि के रूप में जमा करनी होगी, जो कार्य पूर्ण होने पर वापस की जाएगी।

अतिरिक्त उपायुक्त सतबीर मान ने जिलेवासियों से अपील की कि वे इस योजना का लाभ उठाकर न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में भागीदार बनें, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्राम स्वराज की दिशा में भी सशक्त योगदान दें।

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