श्रीलंका में ईस्टर हमलों के बाद पहली बार हुई रविवार की सामूहिक प्रार्थना सभा
श्रीलंका में ईस्टर के मौके पर हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद रविवार को तीन हफ्ते बाद कड़ी सुरक्षा के बीच कैथलिक गिरजाघरों में पहली बार सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित की गई।
ईस्टर पर गिरजाघरों और होटलों को निशाना बनाकर किए गए हमलों में 250 से अधिक लोग मारे गए थे।
आत्मघाती हमलों के बाद सभी गिरजाघरों में नियमित प्रार्थना सभाएं रद्द कर दी गई थीं। इन हमलों की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी।
हालांकि कोलंबो कार्डिनल के आर्कबिशप रंजीत ने पिछले दो हफ्तों में रविवार को निजी प्रार्थना सभाएं की थीं जिन्हें राष्ट्रीय टीवी चैनल पर प्रसारित किया गया।
कार्डिनल रंजीत ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि रविवार को उनके डायोसिस से प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी।
निवासियों ने कहा कि हमले के बाद से आज सुबह (रविवार) ही गिरजाघरों ने रविवार की सामान्य प्रार्थना सभाएं शुरू की हैं।
दो कैथलिक समेत तीन गिरजाघरों एवं तीन आलीशान होटलों पर 21 अप्रैल को हुए हमलों के बाद से पूरे श्रीलंका में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
अधिकारियों ने चर्च परिसर में किसी वाहन को प्रवेश नहीं करने दिया और श्रद्धालुओं से कम से कम समान लेकर आने को कहा गया था।
सैन्य बल और सशस्त्र पुलिसकर्मी गिरजाघरों की ओर जाने वाली सड़कों पर गश्त लगा रहे थे। परिसरों के बाहर भी सुरक्षाकर्मी तैनात थे।
कार्डिनल रंजीत ने 30 अप्रैल को कहा था कि श्रीलंका में सार्वजनिक प्रार्थना सभाएं पांच मई से शुरू होंगी और कड़े सुरक्षा उपायों के तहत किसी को भी अंदर बैग ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हालांकि दो मई को श्रीलंका की कैथलिक चर्च ने घोषणा की कि और हमलों की आशंका की चेतावनी के बाद अगले नोटिस तक सभी गिरजाघरों में रविवार की प्रार्थना सभाओं को रद्द कर दिया गया है।
ईस्टर के मौके पर नौ आत्मघाती हमलावरों ने इन भयंकर विस्फोटों को अंजाम दिया था जिसमें 258 लोग मारे गए थे और करीब 500 अन्य घायल हो गए थे।
इस्लामिक स्टेट समूह ने इसकी जिम्मेदारी ली थी लेकिन सरकार ने स्थानीय कट्टरपंथी मुस्लिम समूह ‘नेशनल तौहीद जमात’ (एनटीजे) को इन विस्फोटों के लिए जिम्मेदार माना था।

