एयरसेल मैक्सिस मामला: ईडी के समक्ष पेश हुये चिदंबरम, दो घंटे पूछताछ के बाद दोपहर भोजन के लिए निकले
5 जून
मैक्सिस मनी लांड्रिग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने आज पूर्व वित्त मंत्री पी . चिदंबरम से दो घंटे से अधिक पूछताछ की।यह पहला मौका है जब वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष पूछताछ के लिये पेश हुये।
संप्रग शासन काल में वित्त एवं गृह मंत्री रहे चिदंबरम आज प्रात : 10.58 बजे एजेंसी मुख्यालय पहुंचे। उनके साथ एक वकील भी थे। हालांकि , इस दौरान सुरक्षा को ध्यन में रखते हुये एजेंसी मुख्यालय परिसर के आसपास पुलिस , सीआरपीएफ जवानों का पहरा लगा हुआ था।
अधिकारियों ने बताया कि दो घंटे से अधिक की पूछताछ के बाद चिदंबरम को डेढ बजे के आसपास भोजन के लिये जाने की अनुमति दी गई। पूछताछ तीन बजे से फिर शूरू हो सकती है।
प्रवर्तन निदेशालय ने कल ही चिदंबरम को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के लिये नया समन भेजा था। एजेंसी मनी लांड्रिंग रोधी कानून (पीएमएलए) के तहत चिदंबरम का बयान रिकार्ड कर रही है।
एयरसेल – मैक्सिस सौदे में चिदंबरम की भूमिका जांच के घेरे में आई है। इस मामले में ईडी उनके पुत्र कार्ति से पहले ही पूछताछ कर चुका है।
चिदंबरम ने इससे पहले पिछले सप्ताह विशेष सुनवाई अदालत के न्यायधीश ओ पी सैनी की अदालत में गिरफ्तारी की कार्रवाई से बचने के लिये अग्रिम अर्जी दाखिल की थी। अदालत ने आज ही एक आदेश में ईडी को 10 जुलाई तक चिदंबरम को गिरफ्तारी अथवा उनके खिलाफ किसी तरह की उत्पीड़क कारवाई से रोक दिया है।
ईडी ने इससे पहलें चिदंबरम को 30 मई को उसके समक्ष पेश होने को कहा था। चिदंबरम ने उसी दिन अदालत का दरवाजा खटाखटाया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चिदंबरम ने ईडी द्वारा जारी समन का अनुपालन करने का वायदा किया है।
एयरसेल – मैक्सिस मामला विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड द्वारा मैसर्स ग्लोबल कम्युनिकेशंस होल्डिंग्स सविर्सिज लिमिटेड 2006 को एयरसेल में निवेश की अनुमति दिये जाने से जुड़ा है।
उच्चतम न्यायालय ने गत 12 मार्च को सीबीआई और ईडी को निर्देश दिया कि एयरटेल मैक्सिस समेत 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े मामलों की जांच छह माह में पूरी की जाए।
ईडी यह जांच कर रहा है कि उपरोक्त मामले में 2006 में तत्कालीन वित्त मंत्री ने 80 करोड़ डालर (उस समय की दर से 3500 करोड़ रुपए) के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रस्ताव को अनुमति कैसे दी जबकि इतने बड़े स्तर के प्रस्ताव के लिए मंजूरी मंत्रिमंडल के आर्थिक मामलों की समिति से ली जानी चाहिए थी। एजेंसी का कहना है कि इस प्रस्ताव में दिखाया गया तथा कि एफडीआई 180 करोड़ रुपए का होगा ताकि उसको मंत्रिमंडल की उस समिति के सामने ले जाने की जरूरत न हो।

