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जी7 ने व्यापार में संरक्षणवाद के विरोध का संकल्प किया

ला मालबाई (कनाडा), 10 जून (भाषा) अमेरिका सहित जी 7 समूह देशों के नेताओं की यहां हुई दो दिन की शिखर बैठक के बाद जारी साझा वक्तव्य में संक्षणवाद का मुकाबला करने और व्यापार की राह में बाधाएं कम करने का संकल्प व्यक्त किया गया है। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दुनियाभर के कई देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति से खफा है। ट्रंप ने यूरोपीय संघ , कनाडा और अन्य देशों से इस्पात तथा एल्युमीनियम के आयात पर ऊंचा प्रशु ल्क थोप दिया है। इसके विपरीत ट्रंप का कहना है कि यूरोपीय संघ , कनाडा तथा चीन सहित उसके बड़े व्यापारिक भागीदारों ने अमेरिका की उदारता का फायदा उठाया तथा अपने बाजारों को संरक्षित रखा। वे इन देशों पर बाजार बाधाएं खत्म करने का दबाव दे रहे हैं। जी 7 की घोषणा में संगठन के अंदर तीखे मतभेदों पर पर्दा डालने का प्रयास दिखता है। रपटों के मुताबिक दो दिन की चर्चा में अमेरिका तथा मेजबान कनाडा और यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। एकता का आवरण डालने के प्रयासों के बावजूद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने कहा कि वह इस्पात और एल्युमीनियम पर अमेरिकी शुल्कों के जवाब में अमेरिकी सामानों पर शुल्क लगाने की अपने घोषणा पर कदम बढ़ाएंगे। आठ पृष्ठ के घोषणा पत्र में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भी जिक्र किया गया है और जी 7 ने संकल्प किया है कि वे मिल कर यह सुनिश्चित करेंगे संयुक्त ईरान कभी भी परमाणु हथियार की तलाश , विकास या उसकी प्राप्ति न कर सके। ’ समूह ने रूस से मांग की है कि वह पश्चिम के लोकतांत्रिक देशों की जड़ खोदने के प्रयास बंद करे। ’ जी 7 देशों के देशों ने माना है कि जलावायु परिवर्तन और उससे निपटने के मुद्दे पर समूह के अंदर मतभेद है। गौरतलब है कि ट्रंप ने अमेरिका को पेरिस समझौते से अलग कर लिया है। बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर उंगलियां उ ठायी गयीं और कहा गया कि वे एकतरफा कार्रवाई कर नियम आधारित विश्व व्यापार प्रणाली को कमजोर कर रहे हैं। लेकिन घोषणा पत्र को इस मामले में नरम बनाते हुए नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली की भूमिका को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है और संरक्षणवाद का मुकाबला करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गयी है। ’’ वक्तव्य में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में तेजी से सुधार के लिए दबाव बनाने का संकल्प किया गया। गौरतलब है कि ट्रंप डब्ल्यूटीओ को अपने देश के लिए आपदा करार देते रहे हैं। ट्रुडो ने यहां शुक्रवार सवेरे से चल रही इस बैठक के बाद कहा कि इस सप्ताहांत हमने जो किया वह यह है कि हम इकठ्ठा हुए , जम कर बैठे और एक – एक वक्तव्य तय किया जिस पर हम सभी सहमत हो सकते थे। ’ जाहिर है राष्ट्रपति ( ट्रंप) अब भी वह बोलते रहेंगे जो उन्हें बोलना है। उनका संकेत ट्रंप के उन व्यापार निर्णयों की ओर था जिनमें अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर धातुओं पर शुल्क लगा दिए गए हैं। 

 

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