शुल्क वृद्धि के प्रभाव का आकलन करने के लिये अमेरिकी अधिसूचना का करेंगे इंतजार: भारत
भारत ने आज कहा कि वह इस्पात और एल्युमीनियम पर आयात शुल्क बढ़ाने से घरेलू कंपनियों पर इसके प्रभाव का आकलन करने के लिये अमेरिकी अधिसूचना का इंतजार कर रहा है।
वहीं दूसरी तरफ चीन, जापान समेत कई देशों ने अमेरिका के इस कदम की आलोचना की है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्पात आयात पर 25 प्रतिशत और एल्युमीनियम आयात पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने के आदेश पर गुरुवार को हस्ताक्षर कर दिये। इससे दुनिया में वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका बढ़ी है।
यहां संवाददाताओं से बातचीत में वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन में अधिकतम स्वीकार्य सीमा या प्रतिबद्धता के विपरीत अमेरिका के आयात शुल्क बढ़ाने के कदम को लेकर चिंता है।
यह पूछे जाने पर कि भारत पर शुल्क वृद्धि का क्या प्रभाव पड़ेगा, सचिव ने कहा कि निर्यातक होने के नाते निश्चित रूप से कुछ प्रभाव पड़ेगा
उन्होंने कहा कि हम शुल्क वृद्धि को लेकर अमेरिकी अधिसूचना का इंतजार करेंगे।
यह पूछे जाने पर कि क्या अन्य देशों ने भी डब्ल्यूटीओ के अंतर्गत स्वीकार्य सीमा से अधिक दरें बढ़ायी हैं, रीता ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन के किसी भी अन्य देश ने सुरक्षा का हवाला देते हुए ऐसा नहीं किया जैसा कि अमेरिका ने किया।
उन्होंने कहा कि भारत संरक्षणवादी देश नहीं है और हमेशा शुल्क को डब्ल्यूटीओ की स्वीकार्य सीमा में रखा है।
सचिव ने कहा कि स्विट्जरलैंड के जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन की महा परिषद की बैठक में भारत समेत 17 देशों ने अमेरिका के आयात शुल्क बढ़ाने की योजना का विरोध किया था।
उधर, चीन ने अमेरिका द्वारा इस्पात और एल्युमीनियम पर आयात शुल्क लगाये जाने की भर्त्सना करते हुये कहा कि इस तरह के कदमों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिवेश को गंभीर नुकसान होगा।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी वक्तव्य में कहा गया है कि ‘‘चीन इसका कड़ा विरोध करता है।’’
जापान ने अमेरिका द्वारा लगाये गये शुल्क पर खेद जताया है और कहा है इसके गंभीर प्रभाव होंगे।
जापान के विदेश मंत्री तारो कोनो ने अमेरिका के इस कदम को खेदजनक बताते हुये कहा, ‘‘इन उपायों का जापान और अमेरिका के आर्थिक संबंधों पर गंभीर प्रभाव होगा …. साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित होगी।’’ यूरोपीय संघ ने कहा है कि अमेरिका को उसे इस शुल्क से अलग रखना चाहिये। यूरोपीय संघ के शीर्ष व्यापार अधिकारियों ने इस पर जोर देते हुये कहा कि ब्रसेल्स इस बारे में वाशिंगटन से तुरंत स्पष्टीकरण चाहेगा। यूरोपीय संघ व्यापार आयुक्त सेसिलिया माल्मस्ट्रोएम ने ट्वीटर पर लिखा है, ‘‘यूरोपीय संघ अमेरिका का करीबी व्यापार भागीदार है, इसलिये हमारा मानना है कि उसे इन उपायों से मुक्त रखा जाना चाहिये।’’ ब्रसेल्स ने इस्पात और एल्यूमीनियम आयात पर अमेरिका में शुल्क लगाये जाने के जवाब में प्रमुख अमेरिकी उत्पादों की सूची तैयार कर ली है जिन पर वह जवाबी शुल्क लगा सकता है। यूरोपीय संघ का कहना है कि यदि अमेरिकी शुल्क से उसका निर्यात प्रभावित होता है तो वह भी जवाबी कदम उठायेगा।
ब्रिटेन के व्यापार मंत्री लियाम फाक्स ने भी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस्पात, एल्युमीनियम पर आयात शुल्क लगाने संबंधी घोषणा की आलोचना करते हुये कहा कि व्यापार विवादों को सुलझाने का यह ‘‘गलत तरीका’’ है।
अमेरिका द्वारा हार्ले डेविडसन जैसी महंगी मोटरसाइकिल पर शुल्क में कमी लाने के अमेरिकी की मांग पर रीता ने कहा कि भारत का स्वयं ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम है और सबसे बड़ा मोटर साइकिल विनिर्माता है। हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा।

